कृषि केंद्र का आसान बिल
कृषि केंद्र का बिलिंग सॉफ्टवेयर। बिल और बाकी साथ रखें।
किसान सामान ले जाए और पूरा पैसा न दे, तो बिल और उधारी अलग-अलग लिखने की जरूरत नहीं। Krishi Udhar में एक ही ग्राहक के साथ दोनों का हिसाब रहता है।
यह वेबसाइट तीन भाषाओं में है। दुकान का app फिलहाल हिन्दी में है।
अभी बीटा मुफ्त है · खाद, बीज और कृषि दवा की दुकानों के लिए
कृषि दुकान का बिलिंग सॉफ्टवेयर — अभी मुफ्त बीटा
खाद, बीज और कृषि दवा बेचने वाले छोटे दुकानदारों के लिए Krishi Udhar में बिल, ग्राहक की उधारी और स्टॉक एक जगह संभालें।
ग्राहक एक बार जोड़ें, सामान और मिला पैसा भरकर बिल बनाएं और प्रिंट करें। उसी ग्राहक का पुराना बाकी, बाद में मिला भुगतान और लौटाया सामान भी हिसाब में रखें।
अभी बीटा के दौरान इस्तेमाल मुफ्त है। आगे की कीमत और शर्तें अभी घोषित नहीं हैं; यह हमेशा मुफ्त रहने का वादा नहीं है।
पहले नमूना दुकान में तरीका देखें। फिर अपनी दुकान जोड़ें और एक ग्राहक के पहले बिल से शुरुआत करें। दुकान का app फिलहाल हिन्दी में है।
मुफ्त नमूना देखेंदुकान के रोज के काम जैसा
बस इन 3 बातों का ध्यान रखें
ग्राहक चुनें
पुराना ग्राहक है तो उसी नाम को चुनें। नया है तो एक बार जोड़ें; हर बिल पर दोबारा जोड़ने की जरूरत नहीं।
सामान और मात्रा भरें
खाद, बीज या दवा चुनें। मात्रा और बिक्री दर देखकर बिल का कुल पैसा जांच लें।
मिला पैसा भरकर बिल बनाएं
पूरा पैसा मिला है या कुछ बाकी है, साफ देखें। बिल सेव होने के बाद उसे खोलकर जांचें और प्रिंट करें।
सेव करने से पहले
एक बार मिलान कर लें
गलत नाम या रकम बाद में उलझन बढ़ाती है। अपने ग्राहक और दुकान के रिकॉर्ड से जांच लें।
- ग्राहक का नाम सही चुना है?
- सामान, मात्रा और दर सही हैं?
- जो पैसा सच में मिला, वही दर्ज किया है?
आपके सवाल
अगर ऐसा हो तो क्या करें?
पुराना ग्राहक फिर से जोड़ना पड़ेगा?
नहीं। पहले से जोड़े ग्राहक को चुनें। उसी ग्राहक के बिल और भुगतान उसके खाते में जुड़े रहते हैं।
पूरा पैसा न मिले तो क्या करें?
जितना पैसा मिला, उतना भरें। बाकी रकम उधारी में रहती है। पैसा बाद में मिले तो भुगतान दर्ज करें, दूसरा बिल न बनाएं।
बिल प्रिंट कर सकते हैं?
हां। सेव हुए बिल को खोलकर प्रिंट का विकल्प चुनें। फोन से प्रिंट करने के लिए आपके फोन और प्रिंटर का सही जुड़ना जरूरी है।
दुकान के दूसरे काम भी समझें
कॉपी का हिसाब, अब एक जगह।
पहले अपनी दुकान जोड़ें। फिर ग्राहक और माल जोड़कर पहला बिल बनाएं। छोटे कदम से शुरुआत करें।



